"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 2 - Hindi Biography World

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Monday, October 22, 2018

"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 2


सेकंड इयर चल रहा था, ठंड के दिन थे, हम सारे दोस्त एक रात कहीं दावत उड़ा के हॉस्टल जा रहे थे | हमारा कारवां उस गिटार वाले के कमरे की तरफ से निकला, यार एक तो डर लग रहा था, वार्डन का, वो रूल है ना 10बजे के बाद हॉस्टल के बाहर नी जाना, और यहां दूसरा दिन लगने की कगार पर था, उसके कमरे के पास गिटार की बहुत अच्छी टोन सुनाई दे रही थी, दोस्त अपने अपने कमरो में थे |पर मैं दुबारा चला गया वही सीढ़ी के पास वाले कमरे में, 47 नंबर के पास वही टोन सुनने| ना ही मेरे दिल में कोई तारीफों के बुलबुले उठ रहे थे, ना ही मैं कोई गिटार के ट्यून का आशिक हूँ , एक ईगो है टॉपर वाला वो बार बार कह रहा था भाई पता कर यार ये पढ़ता कब है | वो दिन निकल गया, कुछ और दिन बीत गए, मेरे ख्यालों से तो भाई साहब उतर चुके थे, हाँ डेली एकाध बार दर्शन हो जाते थे, कभी वो ग्राउंड में बैठ के गिटार को निहार रहा होता, तो कभी छत पर बैठ के अपने उड़ते हुए बालों पर इतरा के, गिटार बजा रहा होता, और मैं, मैं मन में हसता था कि गिटार बिचारा केस भी नी कर सकता, उसने गिटार का शोषण ही कर रखा था, इतना ख्याल तो कोई अपनी मासूक का भी नी रखता| अरे हाँ मासूक से याद आया, मेरी मासूक को तो मुझसे ज्यादा इंटरेस्ट था उसमे, बल्कि कालेज की सभी लड़कियों के जौन एलिया बने हुए थे भाई साहब, देवदास जैसी पर्सनेलिटी होना भी टैलंट है यार आजकल | यार कभी कभी तो लगता था ये सब ड्रामे छोरियों ने इम्प्रेस करने के लिए तो नहीं है, पर नहीं यार, कुछ तो था उसके अंदर छुपा हुआ |इक रोज सब नॉर्मल था, अचानक खबर आई कि किसी की मौत हो गईं, लाश के पास गिटार पड़ा है | इतना सुनते ही मेरे हाथ पांव संन्न पड़ गए, मैं उस दिन जितना तेज भागा था, बिजली और साउंड मेरी स्पीड देख के अपने दांतो तले उंगली दबा लेते| भागते भागते पहुंचा, वारदात की जगह पर, काफी कुछ ख़त्म हो चुका था, पहले कई लोग मरे थे, जिनकी मौत मैंने सुनी थी, परदादी जी, दूर की नानी मां, पड़ोस के चाचा जी, पर कभी आंखो में एक कतरा भी नहीं आया था | आज दिल रो रहा था, आँखे थम नहीं रही थी, सब मेरी ओर ही देख रहे थे, आज मैं अपने इगो को कोस रहा था, काश कभी उससे बात करी होती, काश कभी उसका पता किया होता| पुलिस केस था ये, मर्डर हुआ था कालेज की रेपोटेसन के लिए दबा दिया गया|उसका गिटार मैंने  फोरेंसिक वालों से ले लिया, वैसे भी केस दब चुका था,और कुछ पैसे फेंकने थे गिटार हाथ में था| वो लोग भी सोच में थे, कि पुराना सा गिटार आखिर मैंने दुगना दाम देके क्यूं लिया|सेकंड इयर के एक्जाम जा चुके थे, बड़े पत्थर दिल से एक्जाम दिए, उसके बाद कुछ हफ्तों के लिए कालेज खुला था अप्रेंटिसशिप के लिए| गिटार वाला अब जा चुका था, पर लोगो के लिए, मुझे अक्सर वो दिख जाया करता था, ग्राउंड में गिटार को घूरता, छत पर गिटार बजाता, अब तो मैं उसकी तारीफ भी कर दिया करता था "बहुत खूबसूरत उस्ताद" और बदले में वो मुस्कुरा दिया करता था | अक्सर देर रात मेरी आँख खुल जाया करती थी  गिटार बगल में रखा था, तो भाई साहब उसे ताकते रहते थे, मैं कहता उस्ताद सो जाओ, बदले में मुस्कुरा दिया करता | एक दिन गिटार मैं कालेज ले गया, वहां मासूक के आगे बजाया, पता नहीं क्या तुक्का लगा भाई साहब वाली धुन चल गई, उस दिन से मेरी मासूक मुझसे नाराज है, उसे लगता है कि मुझे इलाज की जरूरत है| हां बिल्कुल है क्यूँकि मुझसे नहीं भुलाए जाते लोग |अप्रेंटिसशिप ख़तम हुई, फ़ाइनल इयर स्टार्ट होने वाला था , ये वही टाईम था जब मैंने उसके बारे में जानने की पूरी तरह ठानी | कुछ सवाल थे जैसे गिटार का उससे रिश्ता क्या था आखिर, और सबसे बड़ी बात उसकी मौत किसने की, और वो चींदी सा इंसान, आई मीन वो शरीफ सा इंसान किसी को क्या रीजन दे सकता है किसी को उसका मर्डर करने का..... |

To be continued..... 

Other parts 
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"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 1
"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 2
"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 3
"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 4

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