"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 3 - Hindi Biography World

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Monday, October 22, 2018

"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 3




अप्रेंटिसशिप के समय से मुझे सारे दोस्तो ने छोड़ दिया था, यहा तक की वो लड़की जिसे मैं अपनी जिन्दगी समझता था, उसने भी मुझे कह दिया था कि तुम्हें इलाज की जरूरत है | मेरे साथ था तो बस वो गिटार, अब उन दिनो मैं ग्राउंड में. बैठ के उसे ही निहारता, यूँ लगता कि मैं भाईसाहब को देख पा रहा हू उसमे, कभी कभी तो छत पर जाकर गिटार बजाता, जो भाईसाहब किया करते थे, वो सब कर रहा था| फिर कुछ दिनों की छुट्टिया शुरु हुई, मैंने सोचा गिटार वाले के घर चला जाए, अपने घर जाने की हर बार मुझे जल्दी हुआ करती थी, पर अब घरबार हर चीज़ से मन विरक्त हो चुका था, मौत को बहुत करीब से देख लिया था, वो कहते है ना, "दामन में जितने भी समेट ले तू हीरे मोती, पर मेरे भाई कफन में जेब नहीं होती"| गिटार वाला यही लखनऊ के पास फैजाबाद का है,सोचा बस से जाकर पता करते है, बस में खिड़की वाली सीट पर मैं बैठ गया, बूंदा बांदी लगातार चालू थी, बस में भी गिनती के पैसेंजर थे, गिटार हाथ में था बस, और जेब में चंद रुपये थे, कई दिनो से दाढ़ी और बालों का खयाल नहीं किया |ये भी अपनी शरारत में मशगूल यहा वहा उड़ते रहते है, लोगो की नजरे मुझे उसी तरह कचोट रही थी, कभी जैसे मैं भाईसाहब को देखा करता था| फिर मैंने भी वही किया जो भाईसाहब करते थे, इग्नोर | कुछ घंटो में मैं फैजाबाद पहुंचा, सरयू के किनारे बसा ये शहर अपने आप में ही एक तिलिस्म सा है, यहां की हवा इतनी रूमानी है कि कोई भी मदहोश हो जाए |कालेज से जो एड्रेस मिला था, उसी एड्रेस पर मैं गया , पहुंच के पता चला कि भाईसाहब की माताजी की तो काफी सालों पहले ही मौत हो चुकी थी, और उनके पिताजी भी कुछ दिनों पहले चल बसे थे, | उनकी जमीन को गुंडा राज से हथिया लिया गया था| इक नई बात जो खुल के सामने आई कि जो आदमी कभी लड़कियों की ओर पलट कर देखता तक नहीं था, कभी वो पूरे अवध का सबसे बड़ा आशिक था, उसकी गिटार की धुनों का पूरा अयोध्या दीवाना था, जिस लड़की से वो प्यार करते थे, बचपन से उसी के साथ थे, माँ बाप ने भी बचपन में उनकी शादी फ़िक्स कर दी थी, उनकी मोहब्बत की कसमें खाई जाती थी | उनकी पड़ोसन ये सारे किस्से बता रही थी, और भाईसाहब बगल में बैठ के खिलखिला रहे थे, बस में भी मैंने बहुत पूछा कि आप ही बता दो, कुछ कहा ही नहीं बस मुस्कुराते रहे | एक बात जो ये पता चली की वो लड़की, जो भाईसाहब के जीवन की संगिनी थी वो हमारे कालेज की ही थी| उसका नाम श्रुति था, वही श्रुति जो हमेशा सबसे यहां वहां लड़ती रहती है, अरे वही जिसका बॉयफ्रेंड बुलेट लेकर आता है,... बट एक सेकंड... भाई साहब की मंगेतर थी ना वो, और प्यार एकतरफा भी नहीं था, फिर यार श्रुति ने भाईसाहब को बॉयफ्रेंड बनाने की क्या आन पड़ी थी , और उनकी मौत से इसका क्या संबंध.... |अब ये सब तो कल श्रुति ही बताएगी कॉलेज में|
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To be continued..... 

Other parts 
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"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 1
"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 2
"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 3
"गिटार वाला लड़का" पार्ट - 4

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