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Thursday, October 18, 2018

"जब टूटेगा दिल तुम्हारा" Tales by Kavi Agyat

जब टूटेगा दिल तुम्हारा, तब शायद तुम्हें भी पता चले कि खाने के टेबल पर आंसू छुपाने के लिए कितने ग्लास पानी पीने पड़ते है| जब लोग सोचते है कि आंखो में उतरा जहर, मिर्च का है और तुम्हें ही पता होता है कि ये किसी की बेवफ़ाईयों का असर है |जब आंखे घर के हर कमरे की पंखे से ऊंचाई नापती हैं, जब मरने की तरीकों से दिमाग भर जाता है, तब तुम्हें शायद घिन्न हो जाए आईनों से, क्योंकि बर्दाश्त नहीं होगा तुम्हें देखना अपना वो चेहरा जिसे ठुकराया है किसी नें |
जब तुम्हें भी इस दुनिया के तमाम लोगों से नफ़रत हो जाए, जब कोई भी रिश्ता तुम्हें अकेलेपन की गहराइयों से न निकाल पाएगा | तुम्हें पता चलेगा कि कैसे आंसुओं के साथ बह जाता है सारे शरीर का लहू, तुम्हें पता चलेगा कि आँखे बंद करते ही कैसे बर्बादियों के मंजर आँखों के आगे आते है |
शायद रातों में जब कभी तुम्हें नींद आ जाए तब तुम्हें दिखे एक सुनसान कमरा, जिसमे झुलसी हुई बैठी है इक ओर तुम्हारी मोहब्बत, और जहां की तमाम बेवफ़ाईयां हंस रही है उसपर |
तुम्हें पता चलेगा अपनी जान को खो के कितना मुश्किल हैं ज़िंदा रहना |
खुदा करे वो दिन न आए कभी |
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©® Kavi Agyat

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