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Monday, October 29, 2018

"तुम्हारी मौत" Tales by Kavi Agyat


मेरे कैंसर का आखिरी दौर चल रहा है, तुम्हारी मौत को भी 5 साल हो गए है| अब 24 घंटो में से कितने ही घंटे तो बेहोशी में गुजर जाते है, बीपी लो का पेशंट हूं, कब उठा कब बेहोश मुझे खुद नहीं पता चलता| याद है 5 साल पहले की वो रात जब मैं यूहीं बेहोश हुआ था, रात के तीसरे पहर मे हमारे घर में चोर घुस गए थे, सिद्धार्थ हमारा बेटा, उसकी गला रेत कर हत्या कर दी गई, और तुम्हारी लाश को जला दिया था, ऐसा मैंने देखा तो नहीं था, क्यूकि मैं तो बेहोश था ना, सब बताते है ऐसा हुआ था, ऐसा ही हुआ होगा| याद है उससे दो दिन पहले जब मैं, अपनी कनाडा की बिज़नस ट्रिप से लौटा था, जब तुम्हें मैंने शर्मा जी के साथ सिनेमा में देखा था, उस दिन तो चाहत थी मेरी कि जलाकर राख कर दू तुम्हें, जब तुमने मुझे देखा था, हमारी आंखो में आंसू थे, तुम्हारी आंखो में मगरमच्छ के और मेरी आँखों में रुसवाई के| याद है, तुमने मुझे क्या सफाई दी थी, तुम शर्मा से शादी से पहले से प्यार करती हो, हमारा सिद्धार्थ, सॉरी तुम्हारा सिद्धार्थ भी उसी का बेटा है | जब तुमने ये बताया, तो मेरी नजरो में मैं गिर गया था, मैंने 4-4 ज़िन्दगी खराब कर दी| पश्चाताप का आखिरी रास्ता था तुम्हारी शर्मा से शादी कर दी जाए, मेरे मन में पहला खयाल तो तुम्हें जला देने का था, पर बदले की आग से उबर कर मैंने शादी के लिए भारी मन से हां कर दी थी |आखिर प्यार किया था तुमसे जान से भी ज्यादा, पर उसी दिन शर्मा की कार का भी बुरी तरह एक्सिडेंट हो गया था, और तुम्हें,
तुम्हें तो चोरो ने जला दिया, और मुझे पता भी नहीं चला क्यूकि बेहोश था ना मैं | अरे हां ये मेरा कैंसर, लोग कहते है बुरे कर्मों का फल मिलता है, लोग कहते है, सही ही कहते होंगे |

©® Kavi Agyat 

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