"Anath hoon" Tales by Kavi Agyat - Hindi Biography World

Breaking

Follow by Email

Tuesday, October 16, 2018

"Anath hoon" Tales by Kavi Agyat



"अच्छा वो लड़की देख रहे हो, जो वहां चाय के ठेले पर समोसे तल रही है, उसकी शक्ल ना बिल्कुल मेरी बहन से मिलती है| अच्छा वो देखो, वो आदमी जो अपनी बाइक को भगाते हुए,पुलिस की नजरो से छुपाते हुए, बच के निकला अभी, पता है उसका मोटापा बिल्कुल मेरे मौसा जी जैसा है| सुनो.....जिस दुकान से ये तुमने छाछ के पैकेट लिए न, उन आंटी की बाते बिल्कुल मेरी माँ जैसी है| और पता है आज हम जिस बस में आ रहे थे... "
" अमा मियां, चुप भी करो अब|ये क्या तबसे इनके आँख, नाक कान, मूह अपने रिश्तेदारों से मिला रहे हो|क्या बेवकूफ़ हो..? "
" नहीं..! अनाथ हूँ..!"
.
©® Kavi Agyat

No comments:

Post a Comment