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Thursday, October 11, 2018

"तुम कैसी नज़र आती हो"



"Tum kaisi Nazar aati ho"

मेरी बातें सुनकर,
माथे पर बल जो लगाती हो,
मेरी आँखों में आँखे डालकर,
जब जी भर मुस्कुराती हो,
मैं देखना चाहता हूं ऐसे,
तुम कैसी नज़र आती हो,
.
जब पलटकर सवाल पर सवाल करती हो,
जब मेरे गुस्से से तुम कई बार डरती हो,
जब किस्से अपने धीमी आवाज में बताती हो,
मैं देखना चाहता हूं तुम कैसी नजर आती हो,
.
जब सपनों की उड़ान पर दोनों साथ जाते हैं,
जब बुरे सपनों में मुझे बचाने तुम्हारे हाथ आते हैं,
जब नजरे उठाकर, झुकाकर, तुम नजरे उठाती हो,
जब मेरी नजरों की नजर से नजरे बचाती हो,
मैं देखना चाहता हूं तुम कैसे शर्माती हो,
मैं देखना चाहता हूं तुम कैसी नजर आती हो,
.
हर समस्या का लगभग समाधान लगती हो,
कभी शेख्शपियर लगती हो,
कभी रसखान लगती हो,
कानूनी दुनिया से परे जो है,
मेरी खुशियों का मुझे प्रावधान लगती हो,
सुनो,
ये मेरे मन की बातें यूँ कैसे कह जाती हो,
मैं देखना चाहता हूं तुम कैसी नजर आती हो,
.
गुस्से में नाक तुम्हारी भी क्या लाल होती है,
मेरे बिना क्या तुम्हारी सांसे भी बेहाल होती हैं,
अपनी तारीफ सुनकर तुम कैसे इतराती हो,
मैं देखना चाहता हूं तुम कैसी नजर आती हो,
.
हर सितम वक़्त का मैं सहुंगा मगर,
यही कहता था और मैं कहूँगा मगर,
काले कोट वाली तस्वीर में, आंखों में बस जाती हो,
मैं देखना चाहता हूं तुम कैसे नजर आती हो,
.
©® Kavi Agyat

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