"जब तुम लिखते हो उस पर" By Kavi Agyat - Hindi Biography World

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Sunday, October 7, 2018

"जब तुम लिखते हो उस पर" By Kavi Agyat


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चाय के दो कप पीने के बाद मैंने डायरी निकालने के लिए  दराज को खोला और दराज खोलते ही कुछ खत जमीन पर गिर पड़े | ये वही खत थे जो ऐतवार को घर पर आए थे | मुझे याद है सोमवार को बिना लिफाफा खोले ही मैंने सारे खत दराज़ में रख दिये थे | उन्ही खतों के बंडल में से अचानक एक नाम देखकर नजरें चमक गईं, हाँ ये वही थी | वही जिसने मेरी ज़िन्दगी के अंधेरों में उजाला किया है, वही जिसने मुझे तब सुना, जब दुनिया ने कहा कि मौन हो जाओ | खैर हम आज ही तो मिले थे तो ये खत लिखने की जरूरत क्या थी भला? मन में जागे हुए कौतहुल से खोलते हुए मैंने तुरंत लिफाफा फाड़ के खत निकाल दिया और पढ़ा | उसमें लिखा था कि,
"सुनो.... उस दिन तुमने मुझसे पूछा था ना कि जब तुम उसपर लिखते हो तो मुझे कैसा लगता है | तुमने पूछा था कि जब तुम उसके बारे में बात करते हो या उसे याद करते हुए या उसके साथ बिताए हुए हर एक लम्हे को अपनी कविताओं में उतार देते हो तो कैसा लगता है | सुनो अज्ञात, मैंने उस दिन कहा था कि एक दिन मैं इसका जवाब जरूर दूंगी | ये बहुत मुश्किल था मेरे लिए उस बारे में लिखना जिसने पहले दिन से ही मेरे दिमाग में घर कर लिया है |
यारा सुनो, मुझे याद है कि वो मैं ही थी जिसने कहा था कि उसे भूलने के लिए आपको किसी और को मोहब्बत करनी होगी और हाँ मुझे आज भी लगता है कि ये किसी को भुलाने का सबसे अच्छा तरीका है | पर यारा सुनो ना, अब मुझे लगता है कि मैं बहुत ज्यादा, बहुत बहुत ज्यादा गलत थी | तुम आज भी उसी से प्यार करते हो, बस उसी से | मुझे लगता है कि तुम हमेशा ही उसके बारे सोचते रहोगे | मुझे लगता है कि तुम मुझमे उसी को ढूंढते हो | मुझे लगता था कि मैं सब भूलवां दूंगी, वो यादें, वो बातें, आपकी उसकी मुलाकातें सब कुछ, पर यार नहीं हुआ ऐसा और अब मुझे नहीं पता कि मैं क्या चाहती हूं |
दरअसल आपको लगता होगा कि मैं कितनी स्वार्थी हूँ, पर नहीं, मुझे अच्छा लगता है जब आप उसके बारे में लिखते हो, कहते हो, उसे याद करते हो, हर चीज को उससे जोड़ते हो | पता है मैं जानना जीना चाहती हूं, हर उस लम्हे को जो आपने उसके साथ बिताए हैं | पर मैं ये सोचकर सहम जाती हूँ कि आप अब भी उसे याद करते हो, और हाँ, आप अब भी उसे प्यार करते हो | मुझे लगता है एक दिन वो आएगी, और आपको मुझसे दूर, बहुत दूर ले जायेगी | जरा सोचो वो किसी दिन आई और अपनी हर गलती के लिए माफी मांगने लगी, आपको हर उस याद की दुहाई देने लगे जो ज़िंदा है आपके जेहन में? वो नजदीक आकर आपके माथे को चूमने लगे ठीक वैसे जैसे वो पहले किया करती थी और क्या आप भी पहले की तरह अपनी आंखे बंद कर दोगे उस वक़्त? क्या उसे अपनाकर गले लगा लोगे ? और फिर मैं, मेरा वजूद सलामत रहेगा क्या आपके बिना? अज्ञात ये सारे सवाल किसी बुरे सपने की तरह हैं |
मैं स्वार्थी नहीं हूं, ना ऐसा है कि मुझे आप पर यकीन नहीं है |पर यारा समझो ना, समझते हो ना मुझे, मुझे डर लगता है बस और मुझे नहीं पता कि ये डर कैसे जायेगा | मुझे नहीं पता कि मैं क्या कर सकती हूं इस बारे में | कभी कभी लगता है कि मैं बेवजह आप दोनों के बीच आ गई | सब मेरा होके भी मेरा नहीं |
तुम्हारी विशु "
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©® Kavi Agyat ❤️🖤

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