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Thursday, October 18, 2018

"सब काले हैं" By Kavi Agyat


सड़कों पर चलते हुए लोग तुम्हें अकेले नजर आते हैं, पर मेरे साथ न जाने क्यूँ ऐसा अब नहीं होता | मुझे हर इंसान के पीछे कुनबा नज़र आता है | उनके पीछे उनका पूरा परिवार चलता है | वो लड़का जो तेजी से भागता हुआ गया न अभी, उसके पीछे उसकी बीमार मां भी थी | दोनों साथ भाग रहे थे दवाई की दुकान की ओर | उस बूढ़े आदमी की पीठ और कंधे पर तुम्हें बस बोरे नजर आ रहे होंगे, पर मुझे वहां उसकी कुँवारी बेटी और अंधा बेटा नज़र आ रहा है | गौर से देखोगे तो सालों पहले मरी उसकी पत्नी भी दिखेगी, जो उसके माथे पर से गिरते एक एक बूंद पसीने को अपनी मांग में सजा रही है | उसे जरूर अपने दिनों में शिकायत रही होगी कि ये बूढ़ा उसे शृंगार का सब सामान नहीं दे पा रहा, पर अब उसे दुनिया का सबसे अनमोल सिंदूर मिला है | अच्छा वो बूढ़े अंकल जिन्होने अभी उस प्रेमी जोड़े को बस में फटकार लगाई, तुम्हें उनकी आंखों में बिछड़ी माशूक का दर्द नजर आया क्या..?
हो सकता है तुम्हें लोग दिखते हो रंग बिरंगी वेशभूषा में, नीले पीले हरे लाल कपड़ों में | पर मुझे लोग बस दो तरह के चोगों में दिखते हैं, कुछ सफेद और बाकी सब काले | कुछ एक जो इक्का दुक्का सफेद मुझे दिखे, वो भी कुछ समय में काले हो जाएंगे | पर पता है ये सारे काले, एक समय में सफेद हुआ करते थे | पर किसी काले ने किसी एक सफेद को काला किया, फिर उस काले हुए सफेद ने किसी को काला किया| ये क्रम चलता जा रहा है | एक सवाल कौंधा होगा कि पहला सफेद प्यादा, काला किसने किया? अजी समय ने..! ये निरा समय शुरुआत से ही काला है |
काले भी कई तरह के होते हैं, कुछ हल्के काले तुम्हारी आँखों की तरह, कुछ थोड़े ज्यादा काले तुम्हारी जुल्फों की तरह, कुछ बिल्कुल काले मेरी सूरत की तरह |
तुमने वो लड़के देखे हैं जो वहां पार्क के कोने में बैठकर नशा करते हैं, उनकी सुर्ख आँखों में तो कई बार देखा होगा तुमने, कभी उनके पैरों में देखना | तुम्हें वहां नज़र आएंगे, आई आई टी, नीट, सीलैट और आईएएस करने के कुचले हुए सपने | ये सपने कभी इन्होने ही देखे थे, क्यूंकि पैदा होने के बाद इन्होने भी तुम्हारी तरह पहले दूध ही पिया था, नशा नहीं किया था | आसमान के नीचे सोते वक़्त इन्होने भी अपने दादाजी से कहा था कि, "ए बाऊ हम तोहरे खातिर नीलकी बत्तीया वाली करिया लाइब" | पर फिर उस रात ये बात उसके दादाजी के अलावा किसी और ने भी सुनी थी | अरे वही अपना पुराना राक्षस समय, और उसके कुछ अनुयायियों ने कुचलने पर मजबूर कर दिए सपने | सपने कुचलने के बाद नज़र झुका कर चलते थे ये, और नजरों में खटकते थे वही सपने |
और भी बहुत कुछ कहना है, मैं अपनी नजर से तुम्हारा नजरिया बदलना चाहता हूं, पर तुमसे गुजारिश है कि मुझे नज़रअंदाज कर दो |
वो क्या है न मैं पागल हूँ, झूठ की इमारतों के गिरने से बेघर हुआ हर इंसान पागल होता है.. |
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(पढ़ने के लिए शुक्रिया)
❤️
Penned by Kavi Agyat

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