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Tuesday, October 16, 2018

"from the Diary of a Struggling Writer" Tales by Kavi Agyat

आजकल रातें नहीं गुजरती, एक अजीब सी बेचैनी साथ रहती हैं | एक हफ्ते हो गये आज, तुम्हारी आवाज सुने हुए | किसी की भी कॉल आती है, तो लगता है तुम ही हो | इन बेचैनी भरी रातों में, मुझे वो रात याद आती है जब मैंने पहली बार तुमसे बात की थी | उस दिन मैं जल्दी सो गया था, फिर अचानक आँख खुली, और नींद नदारत हो गई | फेसबूक खोला और तुम्हारे लाइक का नोटिफिकेशन आया| उस वक़्त मात्र दो लोग ऑनलाइन थे, एक तुम और एक मेरे चाचा का बेटा राम खिलावन | अब उससे तो मैं सामने सामने बात नहीं कर पाता, चैटिंग करने के लिए तो शायद अगला जन्म लेना पड़े | रात काटने के लिए तुम्हें ही, वेव कर दिया | पहले चैटिंग, फिर कॉल | तुम्हारी वो कॉलरट्यून, "तु नज़्म नज़्म सा मेरी"..! तुम्हारी करिश्माई आवाज | उस दिन जो कॉम्प्लिमेंट दिया था वही आज भी कहूंगा, ये डॉक्टरी छोड़ो साहब, सिंगिंग करो आप | कहते हैं कि प्यार एक सेकंड में होता है, ये बात उस दिन मुझे सच में पता चल गई | हालांकि उस प्यार को जताने और बताने में काफी टाइम लग गया | इस गुस्ताखी के लिए हमेशा माफी चाहूंगा | हालांकि अब कभी कभी सोचता हूँ कि, गर उस रात मैं अचानक नहीं उठा होता तो, मैंने तुम्हें वेव नहीं किया होता तो, तुम मेरे फेसबूक पेज पर नहीं आई होतीं तो, उफ्फ.... डर लगता है ये सब सोच के | अब एक पल भी तुम्हारे बिना सोच नहीं सकता| हमारी कॉल के एंड में एक गाना सुनाया था, याद है....
"तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई,
 यूहीं नहीं दिल लुभाता कोई..!"
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©® Kavi Agyat

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