"He is no more" Tales by Kavi Agyat - Hindi Biography World

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Tuesday, October 16, 2018

"He is no more" Tales by Kavi Agyat


शाम के समय डाकिया कुछ चिठ्ठीया देकर गया था | उसके बाद से ही मैंने उसे नहीं देखा | जहां तक मैं उसे जानता था, वो रोने धोने वालों में से नहीं था | पर रात भर उसकी सिसकियों की आवाज से पूरा घर गूंजा था | निहायती शरीफ और मासूम सा लड़का था, मुझे अपना बड़ा भाई कहता था और किराया देने में भी कभी देर नहीं की | बीड़ी, शराब, गुटखा, तमाकू इन सबसे उतनी दूरी थी, जितनी मेरी स्कूल टाइम में पढ़ाई से हुआ करती थी | हष्ट पुष्ट था, पर इन दिनों एक रोग पाल लिया था, प्रेम रोग | मोहतरमा की एकाध बार तस्वीर देखी थी, उनके प्रेम में पड़ना तो जायज था | आँखों में नूर ऐसा कि खुदा भी धोखा खा जाए, जैसे सावन में बादल ढक लेते हैं जमीं को, वैसे लटों का एक गिरोह हमेशा आंखो को ढकने की साजिश में रहता है | खैर, आज सुबह जब नाश्ते के वक़्त तक हजार बार खटखटाने पर दरवाजा नहीं खुला तो मैंने दरवाजा तोड़ देना ही वाजिब समझा | अंदर जाते ही देखा तो मेज पर चिठ्ठीया पड़ी थीं | लिखा था कि,
"भूल जाओ मुझे, ख्याल रखना अपना...!"
अब उन चिठ्ठीयों का जवाब लिखने जा रहा हूँ...
"सुनो,
ख्याल रखना अपना,
मर गया अज्ञात..!"
.
©® Kavi Agyat

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