"Kabhi Alvida na Kahna" Tales by Kavi Agyat - Hindi Biography World

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Tuesday, October 16, 2018

"Kabhi Alvida na Kahna" Tales by Kavi Agyat


सुनो...
हर रात की तरह ये रात भी यूहीं गुजर जाएगी. तुम पूछती हों ना कि मैं जगता क्यूं रहता हूँ हर वक़्त, शायद जब से तुम्हें आंखो से लगाया है, मेरी आँख ही नहीं लगती | अब मेज़ पर चाय के साथ चॉकलेट भी पड़ी रहती हैं, तुम्हें पसंद हैं न | चाय बिल्कुल मेरी तरह है मिठास स्वादानुसार, और चॉकलेट बिल्कुल तुम्हारी तरह, उसे फर्क ही नहीं पड़ता सामने कितनी कड़वाहट है, वो मीठी है हमेशा, जैसे तुम | अच्छा पता है आज यूहीं रस्ते पर गुजरते हुए एक गाना , सुनाई पड़ा कि , "कभी अलविदा न कहना" | पांव जम गए, और शायद आँखे भर सी गई थी | ऐसा लगा कि किसी नें उसी नें उसी कुएं में फिर से ढकेल दिया हो जहां से निकलने में इक अरसा लगा था |मुझे पता है कि अब हम साथ नहीं होंगे | शायद कभी साथ होने के लिए हम मिले ही नहीं थे, क्यूकि चांदनी सितारो की नहीं होती, क्यूंकि लहरे किनारों की नहीं होती, पर हां तुम्हारे इनस्टग्राम पर आके तुम्हें घंटो निहारने का हक़ हमेशा रहेगा | और शायद तुम्हें भी याद रहे कि एक पागल मिला था, जो पागल था बचपन से |बातें बहुत सी अधूरी हैं, पूरी न हो तो बेहतर है |
"माना अपना इश्क अधूरा, दिल न इसपर शर्मिंदा है,
पूरा होके खत्म हुआ सब, जो है आधा वही ज़िंदा है"
तुम्हारे दीदार की ख्वाहिश आखिरी सांस तक रहेगी..!
चलो बुद्धू अपना ध्यान रखना ||||
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©® Kavi Agyat

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