"हलफनामा" Tales by Kavi Agyat - Hindi Biography World

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Tuesday, October 16, 2018

"हलफनामा" Tales by Kavi Agyat


कमरे में घुसते ही आंसुओं की एक अजीब सी उमस से मन खिन्न हो जाएगा | कई दिनों से नहीं खुले उस दरवाजे, को खोलने में शायद थोड़ी मशक्कत करनी पड़े |दरवाजे से बाएं, जो मेज़ रखी है, उस पर आधी खुली जौन की शायरी की किताब, शायद पढ़ने वाले की ज़िन्दगी के हालात को बयां करे | मेज़ के थोड़ा सा आगे एक खिड़की है, जहां से नीचे की सड़क पर आवाजाही करते सभी लोग दिखते है | खिड़की थोड़ी सी मनहूस है क्यूकि इसके फ्रेम में कोई टिकता नहीं कभी |
वहां से दो कदम आगे आने पर एक रैक दिखेगी किताबो से भरी, रैक की खासियत ये है कि ग़ालिब से लेकर कुमार विश्वास तक, सभी की धरोहरों को बांधा हुआ है, एक जगह | जब पलंग के पास नीचे पड़ी लाश की तफ्तीश की जाएगी, तब पता चलेगा कि मरने वाले नें पुराने खतों, तस्वीरों के साथ साथ खुद को भी मुखाग्नि दे दी | जला नहीं वो, ज़रा भी, पर खतों के अल्फाज़ों नें जलते हुए उसे जला दिया, तस्वीर में मासूक के जलते हुए अक्सों नें उसे जला दिया | कभी वो शख्स आग था, अब महज़ राख है |
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पूरा कमरा छानने के बाद, लिख दिया जाएगा हलफनामे में की मृतक "अज्ञात" है |और कातिल.. अजी वो भी " अज्ञात " है |
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©® Kavi Agyat

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