"Teri Yaad" Tales by Kavi Agyat - Hindi Biography World

Breaking

Follow by Email

Tuesday, October 16, 2018

"Teri Yaad" Tales by Kavi Agyat


|| तेरी याद ||
.
मौसम बहुत अच्छा है आज का. मेज पर कुछ कागज रखे थे खिड़की से आये झोंके नें उन्हे कब उड़ा दिया कुछ पता नहीं चला. हाँ वहीं खिड़की जहां से वो सड़क दिखती है, जिस सड़क पर तुम अक्सर साइकिल से गुजरा करती थीं. अब पता है खिड़की के उस ओर झांकने का दिल नहीं होता, क्यूँकि मैं तो मान चुका हूं कि उस ओर तुम नहीं हो, पर ये आँखे, उनकी उम्मीदों का गला घोंटना नहीं चाहता. चाय की चुस्कियां यूं तो अक्सर ही इतनी प्यारी होती हैं, पर आज इनका मिजाज भी बड़ा आला है. और रेडियो वाले भी कहर ढा रहे हैं.. पता है क्या चल रहा है...
.
"जब चांदनी बढ़कर चंदा पर छाती है,
तेरी याद आती है" ft. Adnan sami
.
©® Kavi Agyat

No comments:

Post a Comment