"The love" Tales by Kavi Agyat - Hindi Biography World

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Tuesday, October 16, 2018

"The love" Tales by Kavi Agyat



एक मां जिसने कभी खो दिया अपने इकलौते बच्चे को, उसे कई सालो बाद जब कोई बच्चा ममता की अनुभूति कराता है, तो सालो का मातृत्व वो लूटा देती है उस बच्चे पर | शायद,.. शायद मैं भी तुम्हें उस मां की तरह ही चाहने लगा हूं | धरती जो सुखी रहती है, कई सालो तक, उस पर जब मौसमी बरसात की कुछ बूंदे भी बरसती है, तब वो जमीं उन बादलों की कृतज्ञ हो जाती है आजीवन | शायद,.. शायद मैं भी तुम्हारे कृतज्ञ हूं अब | पेड़ कोई जो खड़ा रहता है सालों से एक ही जगह, लोगो की आवाजाही को निहारता,मौन सा | कभी कभी वो आँखे बंद कर लेता है अपनी, क्योकि थक चुका होता है ना वो रोजमर्रा के उन्ही हालातों को देख देख के | पर जब कुछ बच्चे, उसके आगे बैठकर खेलते है, जब वो उसके तने को पकडकर अलग अलग खेल खेलते है, तब उस समय, उस समय वो पेड़ बस निहारते रहना चाहता है उन बच्चों को | शायद मैं भी, तुम्हें निहारता रहना चाहता हूं आजीवन |
एक बूढ़ा व्यक्ति जिसने अपने बेटे को खो दिया इस दुनिया में कहीं , जब भाग्य से अपने पोते या पोती से मिलता है, जब उनमे अपने बेटे को झलक पाता है, तब वो उनके  वात्सल्य के अधीन हो जाता है| शायद मैं भी हो चुका हूं, तुम्हारे अधीन|
मैं वो माँ, वो पेड़, वो धरती,वो बूढ़ा व्यक्ति, उन सबके जैसा बन चुका हूं, क्या तुम भी मेरे लिए वो बादल, वो बच्चे, वो पोते, या वो बेटा बनोगी |
मर्जी तुम्हारी!
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©®Kavi Agyat

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