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Tuesday, October 16, 2018

"Yaaden" Tales by Kavi Agyat


और लोगों से भरी उस सड़क पर चलते हुए जब मेरी उँगलियाँ, तुम्हारी उंगलियों को पकड़ना जाएंगी ,जब मेरी कलाइयां, तुम्हारे हाथों में जकड़ना चाहेंगी, तब तुम फिर वैसे ही शरमा कर अपनें हाथों को मेरे हाथों से दूर कहीं छिपा लेना | फिर उस चिलचिलाती धूप में अचानक जब कहीं से बादल तुम्हें निहारने आ जाएंगे, और तुम्हें मेरी होते देख तड़प कर आंसू बहाएंगे | वो बूंदें जब तुम्हारी पलकों से गुजर कर तुम्हारे लबों तक आएंगी, तब तुम किसी सीपी में खिले हुए मोती सी लगोगी |वो सड़क जो काफी भरी भरी थी, तब उस सड़क पर बस हम दो पागल ही बचेंगे, मैं फिर बारिश में भीगते हुए, घुटनों पर  बैठकर कहूंगा कि,
"तू जो कहदे अगर तो मैं जीना छोड़ दूं,
बिन सोचे एक पल सांस लेना छोड़ दूं"...!
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आह! यादें...!
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©® Kavi Agyat

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