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Thursday, November 8, 2018

"अटल" याद आओगे


मत कहो कि "दूध में दरार पड़ गई",
"हरी हरी दूब" काल से लड़ गई,
कह दो तुम फिर "हम मनाली नहीं जायेंगे",
कह दोगे फिर "फिर से दिया जलाएंगे",
कह दो कुछ तो, "पांडव कौन, कौरव कौन" गुत्थी तो खोलो,
अच्छा ये न कहो, "अपने मन से कुछ बोलो",
हाँ माना जाना हमने की अब "मौत से है ठन गई ",
और युगपुरुष तुम, "झुक नहीं सकते",
स्वर्ग मातृभूमि महज "भारत जमीं का टुकड़ा नहीं "
तो उस स्वर्ग को छोड़ इस स्वर्ग में रुक नहीं सकते,
शीघ्रता में हो स्वर्ग की "ऊंचाई" पाने को,
काल के कपाल पर "गीत नया गाने को",
कौन बतायेगा बताओ, "राह कौन सी जाये हम",
"बरसो तक जेल में सड़ के"गीत कैसे गाएं हम,
तुम्हारी याद ही बाकी है, हर पल याद आओगे,
जब जब संसद रोयेगा, अटल याद आओगे,

Kavi Agyat

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