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Friday, November 9, 2018

स्याह काली रात, छुपी छुपी सहर


कोई खिलाड़ी खेलने का,तौर भूल बैठा,
एक ढलता सितारा, अपना दौर भूल बैठा,

स्याह काली रात, छुपी छुपी सहर,
चैन है बेघर, क्या गाँव क्या शहर,
हर ओर हर तरफ, तन्हाई की लहर,
गर्त में धकेलता हर सितम, हर कहर,

बड़े दिन हुए, किसी से नजर मिलाए,
बड़े दिन हुए, किसी से बतियाए,
मेरी आंखो में उतरा है, कुछ इस कदर जहर,
स्याह काली रात, छुपी छुपी सहर,

सूरज के सिपाही, किस ओर मुड़ गए,
दरख्त पर बैठे पक्षी कहा उड़ गए,
आफताब बुझा के कोई कर दो मेहर,
स्याह काली रात, छुपी छुपी सहर,

सन्नाटे के जहां में, इक शोर जैसी थी,
बरसात में खिली हुई, इक मोर जैसी थी,
कब्र पर भी उसकी, खुशियों के है बहर,
स्याह काली रात, छुपी छुपी सहर,

नियति के खेल में, यहां कौन बचा है,
जो हुआ, जहां हुआ उसने ही रचा है,
खुदा को हूं कोसता, हर समय हर पहर,
स्याह काली रात, छुपी छुपी सहर,

इक जगह थमे हुए हालत काट दो,
मैं कहूँ वो नहीं रही, तुम बात काट दो,
बेताब है बहने को सुखी हुई नहर,
स्याह काली रात, छुपी छुपी सहर,

Kavi Agyat

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