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Thursday, November 8, 2018

तुम सुबह हो


तुम सुबह हो मेरी हर खराब रात की,
तुम जुबां हो मेरी अनकही बात की,
तुम्हें देखा तो नूर उतरा है आंखो में मेरी,
तुम पहचान हो गुमनाम से अज्ञात की |1|
.
ये चाँद तारे, सूरज तुमसे जल रहे है,
तुम्हारी कशिश के आगे देखो ढल रहे है,
जिस रास्ते की मंजिल हो तुम्हारा इश्क,
उस रास्ते पर हम भी अब चल रहे है|2|
.
सांसे तुम्हें चाहने में हर वक़्त मशगूल है,
ये दौलते जहां की तुम्हारे आगे धूल है,
मोहब्बत को मेरी गर ज़रा भी झूठ समझो,
तो जान मेरी, जान लो तुम्हारी ये भूल है|3|
.
दर्द के दलदल में धंसा हुआ था मैं,
फरेब के गिरह में, फंसा हुआ था मैं,
तुम आ गई और जाने कितने ख्वाब मुस्कुरा दिए,
तुम्हारी परछाइयों में, मेरे गम भी खिलखिला दिए|4|
.
आज का समा, शायद ये कल ना हो,
तुम्हारा दीदार शायद अब कल ना हो,
काट लूंगा ज़िन्दगी मैं आंखो के बिना,
पर तुम्हें देखूँ ना, बस ऐसा कोई पल ना हो|5|

Kavi Agyat

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