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Friday, November 9, 2018

वो पागल कहते हैं तुम्हें


वो पागल कहते है तुम्हें ,
कह लेने दो,
गुमान ये पल दो पल का है,
रह लेने दो,
इस धरा से, उस गगन तक,
आजादी के आगमन तक,
उसके मन तक, मेरे मन तक,
कद तुम्हारा है चमन तक,
देश की माटी पे,
मरने का परवान जो चढ़ा है यूं,
देशभक्ति की ज्वाला का,
हर ओर शोला जो बढ़ा है यूं,
वो क्या जाने, शिल्प हो तुम,
तुमने देश का युवा रचा है,
इक तुम्हारी कहानी सुन के,
हौसला अबतक बचा है,
वर्ना आए कितने और,
कितने ही चले गए,
अहिंसा, उसूलो के नामपर,
हम कबतक ही छले गए,
थे तुम्ही जिसने दिखाया,
दर्शन उन दिशाओं का,
क्या बुरे थे मंजर वो,
वर्णन क्या करू दशाओं का,
इतना ही कहूँगा बस,
गोरो का हाल अत ना होता,
भारत के इतिहास में,
गर मगर भगत ना होता,

Kavi Agyat

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