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Friday, November 9, 2018

कैसे


मिटा तो दी है निशानी तेरी हर,
मैं जख्मों के निशां मिटाऊँ कैसे,

फासला कदम भर का भी ना है पर,
 मैं फासले को पारकर आऊँ कैसे,

चाहत तो तुझसे रहेगी उमर भर ,
तेरे दिए सितमों को भूलाऊँ कैसे,

वादा तो  संग जीने मरने का था,
बता तू कफन में होली मनाऊँ कैसे,

Kavi Agyat

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