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Friday, November 9, 2018

गणतंत्रता दिवस विशेष


आग लगा के कायरता के ढेरों को,
आगे आना होगा हिंदुस्तानी शेरो को,

सिंधु की गहराई में फिर जाना होगा,
जस्तो में से लौहो को उठाना होगा,
ग्रंथो का ज्ञान हमे दोहराना होगा,
भारत को फिर विश्व गुरु बनाना होगा,

कुरान की आयातें देखो पूछ रही है,
गीता की बातें भी देखो पूछ रही है,
अंधकार पसरा है देखो दैरो में,
भाव छुपे देखो बाइबिल के पैरो में,

नगाढ़े सुन उठेंगे  बूढ़े हाथी हम,
जात पात में बंटे हुए सब साथी हम,

आग लगा दो मयखाने के जयकारे को,
पानी ना दो, आशिकी के मारे को,
माटी छोड़ जिसे चोली से प्यार हुआ है,
जन्‍म असफल उसका वो बेकार हुआ है,

युध्दभूमि में जख्मों की परवाह करोगे,
वार नहीं करोगे फिर बस आह करोगे,
आतंकित कर दो भ्रष्ट जयचंदो को,
बिन धड़ लड़ना सिखाओ कबंधो को ,

हिमगिरी की भृकुटी भी देखो तनी हुई है,
नक्शे से मिटने की आशंका बनी हुई है,
आओ आज मिटा दे सारी आशंकाओं को,
हनुमत बन आग लगा दो पापी लंकाओ को,

हालातो को बद से बदतर देखो रहे हो,
आजादी के हुए वर्ष सत्तर देख रहे हो,
पत्रकारिता, चाटुकारिता होती देख रहे हो,
नेताओं की आत्माएं सोती देख रहे हो,

इस भारत के सपने देखे थे क्या,
भगत सिंह की बंदूको नें,
दिनकर नें उजाला नें,
दुष्यंत के ओज संदूको नें,
सोच लाज कितनी राष्ट्रपिता को आई होगी,
जब आपसी मतभेद की बाते उन्हे बताई होगी,
श्वेत कबूतर नेहरू के थे हम,
हम कहाँ लड़ने वाले थे,
इक दूजे को थाम थाम के,
आगे बढ़ने वाले थे,

यहां वहां बस गुन गाते हो ,
काफिर और मौजियो के,
बोलो कभी फैन हुए हो ,
सरहद पर खड़े फौजीयो के,
आंतकी भी बेहतर तुमसे,
लक्ष्य पर जान देता है,
मर जाता है आका खातिर,
आन मान शान देता है,
रोआं रोआं माँ के चरणों में चढ़ाना होगा,
भारत को फिर विश्व गुरु बनाना होगा,

Kavi Agyat

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