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Friday, November 9, 2018

इक तुम्हारा साथ हो


जो हुआ, जब हुआ, जहां हुआ, जैसे हुआ,
क्या हुआ, कब हुआ, कहाँ हुआ, कैसे हुआ,
इन सारे मसलों को,
इक दफा दरकिनार करके,
फिर से गुस्ताखी करनी है,
जीना है तुमसे प्यार करके,
याद क्यू करूं मैं, कि तुमने मुझ संग क्या किया है,
आसुओं के हर हर्फ बहे जो, हर अश्क तुमने ही दिया है,
अतीत की बातों को,
अतीत में ही छोड़ के,
गलत फहमी की दीवार बीच है जो,
उस दीवार को तोड़ के,
इक मनोरम दृश्य है जो,
भविष्य में है दिख रहा,
दुआ कबूली है खुदा ने,
मेरी तकदीर में तुम्हें लिख रहा,
अब तुम्हारा रंग कौन सा,
दिखेगा पता नहीं,
फितरत, सीरत ही है जब ये,
तो छोड़ो खता नहीं,
बस रहो कुछ पल साथ,
बाकी ज़िन्दगी यादों में जी लूंगा मैं,
कुछ पल के पय पिला दो,
ताउम्र फिर जहर पी लूँगा मैं,

Kavi Agyat

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