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Saturday, November 17, 2018

"मेरी दुनिया"


आप और मै, या हम सब, या शायद कोई भी, जिसे आप जानते हो और मैं न जानता होऊँ, या वो जिन्हे मैं जानता हूँ या आप सब न जानते हों, वे सब लोग एक ही दुनिया में रहते हैं | लेकिन हम सब लोगों के अंदर भी एक दुनिया होती है | आज मैं आपको ऐसी ही एक दुनिया के बारे में बताऊंगा |
ये शुरू होती है एक बड़े दरवाजे के साथ, जिसपर अंग्रेजी के शब्दों में कुछ बड़े बड़े और रंगीन वाक्य लिखे होते हैं | ये हमेशा ही प्रेरणादायक होते हैं और वक़्त वक़्त पर बदलते रहते हैं | गेट की खासियत यह है कि आप इसे खटख़टा नहीं सकते | यह आपकी काबिलियत को देखकर खुद ब खुद खुल जाता है | इस दुनिया के अंदर जाने पर आप खुद में बदलाव पाएंगे | आप खुद को देख तो रहे होंगे, पर उस तरह बिल्कुल नहीं जैसे पहले देखा करते थे | आप पाएंगे कि आपके हाथ, पांव या शरीर का कोई भी हिस्सा बाकी के शरीर की तरह नजर नहीं आ रहा, इस दुनिया में रंग, शरीर और पहचान को लेकर होने वाले भेदभाव को आप कहीं नहीं देख पाएंगे | यहां जिस आंकड़े पर आपको परखा जाता है वो है आपके दिल की चमक | जी हां, गौर करेंगे तो पाएंगे कि आपका दिल केवल नजर आ रहा है, जिसकी चमक कम होने के बाद आपको उठाके शहर के बाहर फेंका जा सकता है | इस शहर में आगे आने पर आप पाएंगे कि यहां की इमारतें उपन्यासों के शक्ल की हैं | कुछ ही दूरी पर आपको कुछ इमारतें जलती हुई भी नजर आएंगी, यह सूचक है इस बात की कि बुरा लिखने वालों को माफ नहीं किया जाएगा | इमारत की दीवारों पर हाथों से काफी बड़े अक्षरों में गुलजार की नज्में लिखी गईं हैं, ये इतनी बड़ी और गहरी हैं कि इस दुनिया की उम्र बीतने तक तो इन्हे मिटा पाना शायद नामुमकिन है | आगे बढ़ने पर थोड़ी बारिश होती हुई पाएंगे, दरअसल इस शहर में बूंदे नहीं बरसतीं, यहां बरसते हैं दिल छू लेने वाले गीत | यहां गीतों के बादल हैं, जिन्हे लगभग हर भाषा के संगीत की समझ है | अब तक आपको इस शहर से काफी लगाव हो चुका होगा, पर तभी आपके आगे एक बड़ी सी दीवार आ जाएगी | इस दीवार के पार जो शहर है उसे इस दुनिया का दिल कहा जाता है | पर वहां तक पहुंचना इतना भी आसान नहीं | इस दीवार को पार करने के लिए इस पर चढ़ना नहीं होगा, बाकी की दुनिया को आप जितनी बारीकी से जानते जाएंगे, समझते जाएंगे, यह दीवार उतनी ही नीचे आती जाएगी | एक वक़्त ऐसा होगा जब आप शायद थक हार कर लौट जाएं, पर रुककर अगर आपने उसे समझा तो दीवार अपने आप नीचे आ जाएगी | दीवार के नीचे आने के बाद उस ओर आपको एक बाग नजर आएगा | उस बाग के पेड़ों पर किस्मत के फल लगे हैं, जो आपकी किस्मत को और आपको पूरी तरह बदल सकते हैं | उन्ही पेड़ों के बीच एक झरना है, जहां से कल-कल कल-कल करता असीम प्रेम बहता है | बस इसी झरने के बीच में मैंने अपना घर बना लिया है | अब ये दुनिया ही मेरी दुनिया है | और अपनी दुनिया के बारे में इतना सब जानते हुए भी मैं अक्सर सोचता हूँ कि,
"अनदेखी अनजानी सी,
पगली सी दीवानी सी,
जाने वो कैसी होगी रे"
.
पढ़ने के लिए शुक्रिया ❤️
.
Kavi Agyat

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