"अर्थहीन" - Hindi Biography World

Breaking

Follow by Email

Friday, November 9, 2018

"अर्थहीन"


कि अर्थवान अर्थ, अर्थहीन हो गए,
कि फासले अनर्थ के महीन हो गए,
कि फुट फुट के रोया हर बुझता हुआ चिराग,
घोर तम के आगे दिनेश दीन हो गए||1||

हम आए जब इस बस्ती में, कुछ मकान थे शायद,
कुछ बड़े बड़े ऊंचे ऊंचे आलीशान थे शायद,
पर मकां वालों के उर में न हम रह सके,
न हुआ गुजर, क्योकि वहा श्मशान थे शायद||2||

कि दिल्लगी के शौक में, कुछ मशगूल हो गए थे,
हम सबको ठीक करते करते खुद ही भूल हो गए थे,
थे कभी गुलिस्तां के अजीज फूल हम भी,
पता चला कि खुसबू देते देते शूल हो गए थे||3||

अब काम तो बहुत है, पर काम नहीं कुछ,
गुमनाम सी हयात में, हमारा नाम नहीं कुछ,
बस्ती में लानत की ज़िन्दगी में सुकूं था,
अब कनक के. महल में भी एहतराम नहीं कुछ||4||

पर अब लड़ाई होगी हर ख्वाब के लिए,
अब लड़ाई होगी इंक़लाब के लिए,
नहीं चाहिए मुझे खात्मा अंधेरो का,
मुझे उजाला चाहिए हर आफताब के लिए||5||

Kavi Agyat

Related Post
स्याह काली रात, छुपी छुपी सहर
चलो तुम्हें उस लड़के से मिलवाता हूं
मैं मोहब्बत में हूं
गणतंत्रता दिवस विशेष
मातम
महादेव वंदन
कैसे
गर तुम बेवफ़ा हो गईं
आलौकिक मिलन
वो पागल कहते हैं तुम्हें
इक तुम्हारा साथ हो
आशंका
"अर्थहीन"
तुमसे मोहब्बत करनी है
अब बात नहीं होती
#long_distance_relationship
तुम सुबह हो
इंतकाम
भरी भरी सी आँखे
मर चुके हैं अब सब
सिपाही का संदेशा
"आज़ादी" मुबारक
"अटल" याद आओगे
"कविता" क्या है
"टाइटैनिक : एक जहाज़"
"तुम कैसी नज़र आती हो"

No comments:

Post a Comment