जब गंभीर ने जलाई लंका - Hindi Biography World

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Wednesday, December 5, 2018

जब गंभीर ने जलाई लंका

गौतम गंभीर और विश्वकप में भारत की जीत. ये दोनों नाम एक दूसरे के शायद पर्याय हैं. गौतम गंभीर का नाम सुनते ही जेहन में आती है धीमी बल्लेबाजी, क्रीज पर जमे पांव और एक अकेला योद्धा. गंभीर हमेशा से ही दूसरे बल्लेबाजों से अलग थे. वे हमेशा वहीं रन बनाया करते थे जहां हर दूसरा बल्लेबाज मूह की खाता था. एक वक़्त था जब गंभीर को भारतीय बल्लेबाजी का स्तंभ माना जाता था, धीरे धीरे वह स्तंभ क्षय हो गया. कई सालों तक टीम से बाहर रहने के बाद कल गंभीर ने अंततः सन्यास की घोषणा कर दी. गंभीर को किसी भी तरह का कोई फेयरवेल नहीं मिला. मिलता भी क्यूँ, न उनके नाम दस हजार रन हैं, न ही उन्होने शतकों का अंबार लगाया है. लेकिन बाएं हाथ के इस बल्लेबाज की लोकप्रियता आंकड़ों की मोहताज नहीं है. गंभीर के सन्यास के बाद आइए नजर डालते हैं उनके करियर में खेली गई सबसे ज्यादा अच्छी पारियां :- 
Pic Credit :- Facebook 
1.न्यूजीलैंड के आगे दीवार बन कर डटे गंभीर 
बात उस वक़्त की है जब भारत न्यूजीलैंड के दौरे पर था. अब विदेशों में इक्का दुक्का बल्लेबाजों को छोड़ दें, तो बाकियों का प्रदर्शन जगजाहिर है. चाहे वो इंग्लैंड हो या ऑस्ट्रेलिया, हमारी बल्लेबाजी अक्सर धराशायी हुई है. ऐसा ही एक वक़्त था जब भारत पर हार के बादल मंडरा रहे थे. टेस्ट मैच के तीसरे दिन भारत 300 से अधिक रनों से पीछे था और फॉलो ऑन दिया जा चुका था. फॉलो ऑन में बल्लेबाजी करने के दौरान, भारत के विकेट शुरुआत में गिर चुके थे. हार सबको नजर आने लगी थी. एक ओर जहां विकेट गिर रहे थे, वहीं दूसरी ओर गौतम छोर पकड़ कर खड़े थे. गौतम ने कुल पांच सत्र बल्लेबाजी की और 137 रन बनाकर टीम को ड्रॉ तक पहुंचाया. इस दौरान गौतम कुल 643 मिनट तक क्रीज पर मौजूद थे. भारत ने कुल 160 ओवर बल्लेबाजी की और टेस्ट मैच में हार से बच गया. 
इसके बाद गौतम गंभीर टेस्ट बल्लेबाजी रैंक में नंबर एक तक पहुंच चुके थे. 

2.जब गंभीर ने पाकिस्तान से छीना विश्वकप 
साल 2007, वो साल जब एक लंबे बाल वाले लड़के को एक युवा टीम को देकर कुल 130 करोड़ देशवासियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए भेजा गया. यह साल था पहले टी20 विश्वकप का. सभी बड़े और दिग्गज बल्लेबाजों ने इसमें शिर्कत करने से मना कर दिया था. ऐसे में पहली बार कप्तानी महेंद्र सिंह धोनी को सौंपी गई. उनके साथ टीम में युवराज सिंह, हरभजन सिंह और गौतम गंभीर भी थे, जो आगे चलकर भारतीय टीम के दिग्गज बने. 
ख़ैर उस वक़्त किसी को भी कोई उम्मीद नहीं थी कि भारत विश्वकप जीत जाएगा. भारत ने लगातार मुकाबले जीते और फ़ाइनल तक पहुंचा. फ़ाइनल में टक्कर थी चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के साथ. देशवासी किसी और टीम के खिलाफ हार को सह जाते, पर अब बात आन, मान और प्रतिष्ठा की थी. 
फ़ाइनल में भारतीय बल्लेबाजी फिर धराशाई हो गई. कोई भी बल्लेबाज पंद्रह रन से ज्यादा नहीं बना पाया. ऐसे में भारत की ओर से संकटमोचक बने गंभीर ने रोहित शर्मा के साथ साझेदारी की और टीम के स्कोर को 175 पार कराया. 175 रनों में से गंभीर ने कुल 75 रन बनाए थे. 
गंभीर के योगदान से भारत ने यह मैच जीता, विश्वकप जीता. गंभीर को मैंन ऑफ द मैच और करोड़ो देशवासियों के दिल में हमेशा के लिए जगह मिल गई. 

Pic credit :- Facebook 

3.जब गंभीर ने जलाई लंका 
टी20 विश्वकप को पूरे चार साल बीत चुके थे. एक कप्तान के तौर पर महेंद्र सिंह धोनी स्थापित हो चुके थे. गौतम गंभीर बल्लेबाजी में अपने करियर की ऊंचाइयों पर थे. 2009 में न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट श्रृंखला खेलने के बाद गंभीर टेस्ट रैंक में नंबर वन पहुंच चुके थे. पर करियर की सबसे बड़ी चुनौती अभी आनी बाकी थी. 2011 का विश्वकप जो भारत में ही खेला जाना था. भारत ने अपनी जमीन पर विश्वकप के कई मुकाबलों में जीत हासिल की. जीत का सिलसिला बरकरार रखते हुए भारत ने सेमी फ़ाइनल में सबसे बड़ी टीम मानी जा रही ऑस्ट्रेलिया को रोमांचक मुकाबले में पटख़नी दे दी थी. फ़ाइनल श्रीलंका के खिलाफ खेला जाना था. देश के लोगों में उत्साह था और खिलाड़ी दबाव में थे. 
फ़ाइनल के दिन भारत ने पहले गेंदबाजी करते हुए कुल 270+ रन खर्चे. उसके बाद बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय  टीम के लिए वीरेंद्र सहवाग पहली ही गेंद पर मलिंगा को अपना विकेट थमा बैठे. सचिन भी केवल 29 रन पर आउट हो गए. इस वक़्त दर्शकों मे एक भयानक सन्नाटा पसरा हुआ था. मौजूदा भारतीय कप्तान विराट कोहली भी जल्द ही आउट हो गए. एक ओर जहां विकेट गिर रहे थे, वहीं गंभीर हमेशा की तरह दूसरा छोर पकड़ कर खड़े थे. गंभीर वहां खड़े थे भारत को विश्वकप दिलाने के लिए, अपने करियर की सबसे अच्छी पारी खेलने के लिए. 
गौतम गंभीर ने उस मुकाबले में कुल 97 रन बनाए. शतक से चुके गंभीर, शतक से बढ़कर कुछ हासिल कर चुके थे. 
गंभीर ने विश्वकप की जीत में जो योगदान दिया उसके लिए वे हमेशा याद किए जाएंगे. 

लेखक :- कवि अज्ञात (Kavi Agyat

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