"प्रेम-रहित ग़ज़ल" - Hindi Biography World

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Wednesday, December 5, 2018

"प्रेम-रहित ग़ज़ल"



क्यूँ हर ग़ज़ल यहां, प्यार को समर्पित है,
प्रेम में उपजे, मिले, धिक्कार को समर्पित है ||1||

कलम से अपनी, उनकी व्यथा लिखी क्या तुमने,
जिनकी साँस-साँस साहूकार को समर्पित है ||2||

सैन्य त्याग पर दिखावटी आंसू तो मत दिखाओ,
दिखाओ लिखा वो शब्द, जो उस सत्कार पर समर्पित है ||3||

अपनी टीस, अपने आंसू, लिखे तो क्या लिखे,
एक कविता तो लिखो, जो किसी लाचार को समर्पित है ||4||

प्रेम का विरोध नहीं, प्रेम सर्वमान्य है,
विरोध मेरा प्रेम के बाज़ार को समर्पित है ||5||

लेखक :-  Kavi Agyat

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#long_distance_relationship
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