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Wednesday, December 5, 2018

"तुम मर जाओ"


कभी मेरे सोचे अनुसार, 
नहीं गिरा स्कूल का पंखा, 
न कभी मेरे स्कूल में घुसे आतंकवादी, 
कभी मेरे सामने कोई बस हाइजैक नहीं हुई, 
हाँ जैसे अक्सर फिल्मों में होती है, 
कभी उस गाड़ी में आग नहीं लगी, 
जिसमें भेजी जाती थी मेरी उत्तरपत्रिका, 
बड़े होने के दौरान, 
नहीं चढ़ा मैं, 
प्रेमिकाओं के भाइयों के हत्थे, 
कभी मेरे बिस्तर के नीचे, 
नहीं निकला कोई भी भूत, 
नहीं चोरी हुई मेरी सायकिल कभी, 

ये वो सारी संभावनाएं हैं, 
जिन्हे सोचने भर से ही, 
कंपित हो उठता था मेरा हृदय, 
लेकिन, 
नजर में सोच की मेरी, 
आने वाली हर संभावना, 
कभी पूरी नहीं होती, 

सुनो, 
मैं अक्सर सोचता हूँ, 
कहीं तुम अगले ही पल मर न जाओ...!

Kavi Agyat

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