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Monday, December 10, 2018

व्यथा तो बस यही है


व्यथा तो बस यही है,
कि कोई व्यथा नहीं,
ज़िन्दगी ये मेरी,
हवन की कथा नहीं,
मुस्कुराते, खिलखिलाते,
मेरे पास लोग आते,
एक सुर में हिनहीनाते ,
कहते, अपने दर्द ना बताते,
क्या बताऊ, बताने को,
कोई कथा नहीं,
व्यथा तो बस यही है कि,
कोई व्यथा नहीं,
.
सुलझी हुए जलेबी सी,
मेरी है ये ज़िन्दगी,
उसमें भी लोगों को रसपान चाहिए,
इन्हे दर्द मर्ज क्या पता,
उन्हे बस मनोरंजन का सामान चाहिए,
कहते मेरे पास आके,
बड़े चुपके, बड़े धीरे से,
हमारे यहां दर्द छुपाने की,
 कोई प्रथा नहीं,
पर यार व्यथा तो यही है,
कि कोई व्यथा नहीं,

Kavi Agyat

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