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Monday, December 31, 2018

'Indian National Parks' in Hindi

भारत के प्रमुख राष्ट्रीय उद्यान

भारत के सभी राष्ट्रीय उद्यान आई.यू.सी.एन. की दूसरी श्रेणी के अंतर्गत संरक्षित क्षेत्रों में सम्मिलित हैं। भारत के प्रथम राष्ट्रीय उद्यान हैले नेशनल पार्क की स्थापना वर्ष 1936 में की गई थी, वर्तमान में यह उद्यान जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के नाम से चर्चित है। वर्ष 1970 तक भारत में सिर्फ 5 राष्ट्रीय उद्यान थे। वर्ष 1972 में पारित वन्यजीव संरक्षण अधिनियम एवं प्रोजेक्ट टाइगर आदि परियोजनाएं वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उचित रूप से लागू की गई। जिसके परिणामस्वरूप आज भारत में कुल 104 राष्ट्रीय उद्यानों की स्थापना हो चुकी है, जिनका कुल क्षेत्रफल भारत के भू-भाग का करीब 1.2% है।
परिभाषा: राष्ट्रीय उद्यान एक या एक से अधिक पारिस्थितिकी तंत्रों का समूह है, जिन्हें मानव की पहुँच से सुरक्षित रखा जाता है। यहाँ पर पौधे, वृक्ष, एवं अनेक जीवों तथा उनके निवास स्थानों का संरक्षण एवं उनसे जुड़ी विशेष वैज्ञानिक शोध की जाती हैं। राष्ट्रीय उद्यान की सीमाएं भारतीय कानून के अंतर्गत निर्धारित की जाती हैं।
भारत में स्थित प्रमुख महत्ता रखने वाले कुछ राष्ट्रीय उद्यान निम्नलिखित हैं:-
1) जिम कॉर्बट राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखंड) :
यह भारत का सबसे पुराना एवं पहला ऐसा राष्ट्रीय उद्यान है, जिसमे वर्ष 1973 में भारतीय राष्ट्रीय पशु 'बाघ' के संरक्षण के लिए 'प्रोजेक्ट टाइगर' योजना शुरू की गई एवं अन्य उद्यानों को भी बाघों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया। कॉर्बेट नेशनल पार्क 1318 वर्गकिमी के क्षेत्रफल में फैला, उत्तराखंड में हिमालय की तलहटी पर स्थित है। यह उद्यान अनेक प्रकार के जंगली जीव जैसे बाघ, तेंदुए, हाथी, भालू, हिरण एवं मगरमच्छों का निवास स्थल है।

2)दुधवा राष्ट्रीय उद्यान (उत्तर प्रदेश):
हिमालय की तलहटी में, उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में स्थित, दुधवा नेशनल पार्क, 490 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।यह उद्यान अति दुर्लभ सॉफ्ट ग्राउंड बारासिंघा हिरण का निवास स्थल है। उद्यान में प्रमुखतः बाघ, विभिन्न प्रजाति के तेंदुएं, हाथी, हिरण एवं मगरमच्छ पाये जाते हैं। यह राष्ट्रीय उद्यान एक सींग वाले गैंडे के लिए विशेषतः प्रसिद्धि प्राप्त है। यह उद्यान करीब 400 प्रकार की प्रजाति के पक्षियों के लिये चर्चित है।

3)बाँधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान (मध्य प्रदेश):
बाँधवगढ़ में मुख्यतः नम पर्णपाती वन पाये जाते हैं। यहाँ पर घाटी बांस के घने जंगलों से पटी हुई है। चक्रधर एवं राजबेहर नाम के दो मुख्यतः घास के मैदान उद्यान की शोभा बढ़ाते हैं। नीलगाय, चिंकारा, चौसिंघा, चीतल ,सांभर आदि पशुओं की करीब 34 प्रजातियां यहाँ पर पाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त यहाँ पर चमगादड़ की 4 प्रजातियां, गिलहरी की 2 प्रजातियां, भारतीय पैंगोलिन, भारतीय स्याही, भेड़िया, जंगली कुत्ता, जंगली सूअर, खरगोश, गीदड़, लंगूर एवं रेसस बन्दर इत्यादि पशु भी निवास करते हैं। पार्क में 70 तरह की तितलियां एवं पक्षियों की 255 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमे सारस, हॉर्नबिल, बगुले, क्रेन, चील, बाज आदि प्रमुख हैं।

4)कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (मध्य प्रदेश):
1,940 वर्ग किमी में फैला हुआ कान्हा नेशनल पार्क, एशिया के सबसे बड़े वन्य जीव संरक्षण स्थलों में से एक है। यह पार्क प्रोजेक्ट टाइगर अभियान की सबसे सफल कहानी गढ़ता है, जिसके परिणामस्वरूप वर्तमान में बाघों की संख्या वर्ष1976 से यहाँ दोगुनी हो चुकी है। यह राष्ट्रीय उद्यान मध्य प्रदेश की सतपुड़ा पर्वत माला के पूर्वी हिस्से में फैला हुआ है।
इस उद्यान की स्थापना वर्ष 1955 में की गई थी, तब से लेकर आज तक इस उद्यान ने अनेक विलुप्ति की कगार पर खड़े पशुओं को संरक्षण देकर उन्हें पुनर्जीवन प्रदान किया। इस उद्यान में मुख्यतः बाघ, गौड़, जंगली कुत्ते, चौसिंघा, नीलगाय, भालू, सांभर, चीतल, बारासिंघा, हाइना, जंगली बिल्ली एवं तेंदुआ आदि पशु संरक्षित हैं। शरद ऋतु में, यहाँ अनेक दूर देशों से पक्षी अपना समय व्यतीत करने के लिए आते हैं। कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में 'बामनी दादर' नाम की एक जगह है, जहाँ से पूरे उद्यान का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है। इस स्थान से सूर्यास्त के समय का मनोरम दृश्य उद्यान की शोभा बढ़ाता है।

5) रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान):
यह राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान में विंध्य एवं अरावली पर्वत माला के मध्य स्थित है। यहाँ पर मुख्यतः तेंदुएं अधिक संख्या में पाए जाते हैं। यहाँ पर चंबल नदी के समीप मगरमच्छ एवं घड़ियाल आदि को विचरण करते हुए देखा जा सकता है। गंगेटिक डॉलफिन का भी इस नदी में निवास स्थल है। यहाँ पर काला हिरण भी संरक्षित किया गया है। रणथंभौर उद्यान में पक्षियों की करीब 300 प्रजातियां भी पाई जाती हैं। यहाँ की वनस्पति उष्ण पर्णपाती प्रकार की है। पदम् तालाब नाम की एक बड़ी झील, तथा राजबाग एवं मलिक, दो अन्य झीलें उद्यान के मध्य में स्थित है।

6) गिर राष्ट्रीय उद्यान (गुजरात):
गिर राष्ट्रीय उद्यान आरम्भ में देशी रियासत जूनागढ़ का निजी वन्यजीव उद्यान हुआ करता था। यह जूनागढ़ शासकों के प्रयासों का ही परिणाम था कि विलुप्ति की कगार पर खड़े अन्तिम 20 एशियाई शेरों का संरक्षण संभव हो सका एवं उनकी प्रजाति की संख्या बढ़ाई जा सकी। गिर उद्यान में मुख्यतः शुष्क सागौन एवं बरगद, जामुन जैसे पर्णपाती वृक्ष पाये जाते हैं। गिर के पारिस्थितिकी तंत्र में करीब 450 पौधे, 350 पक्षी, 32 स्तनधारी पशु एवं 24 सरीसृप जीव पोषित एवं संरक्षित हैं। मुख्य रूप से यहाँ एशियाई शेर, तेंदुए, चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंघा, चिंकारा एवं जंगली सूअर आदि शिकारी पशु संरक्षित हैं।

7) काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम):
काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान ,असम में स्थित, एक सींग वाले भारतीय गैंडे का घर माना जाता है। वर्ष 1985 में इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया। यह राष्ट्रीय उद्यान उत्तर में ब्रह्मपुत्र नदी एवं दक्षिण में मिकिर पहाड़ियों से घिरा हुआ है। काज़ीरंगा उद्यान में भी अब तक की सबसे सफल संरक्षण कहानी लिखी जा चुकी है, वर्ष 1908 में अंतिम बचे 12 गैंडों को संरक्षित किया गया एवं आज उनकी की संख्या बढ़कर 1700 हो चुकी है। इसके अतिरिक्त इस उद्यान में भैंसे, एशियाई हाथी, जंगली सूअर, बारासिंघा, तेंदुआ, बाघ, गीदड़, गिब्बन, लंगूर इत्यादि जानवर संरक्षित हैं। काज़ीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पक्षियों की करीब 483 प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमे से 18 वैश्विक स्तर पर अत्यधिक संकटग्रस्त हैं।


8) सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान (पश्चिम बंगाल):
सुंदरबन उद्यान का यह नाम यहाँ पाये जाने वाले सुंदरी वृक्ष के नाम पर पड़ा। यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित, सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान में विश्व के सबसे बड़े डेल्टा का निर्माण, 3 प्रमुख नदियों ( गंगा, ब्रह्मपुत्र एवं मेघना) के संगम से होता है। यह डेल्टा करीब 2,585 वर्ग किमी में फैला हुआ है, जिसका कुछ हिस्सा बांग्लादेश में भी फैला हुआ है। यह राष्ट्रीय उद्यान सदाबहार वनों को भी स्वयं में समाहित किये हुए है। मुख्य रूप से यहाँ बाघ, जंगली सूअर, चितकबरे हिरण, बन्दर, लोमड़ी, नेवले, गंगेटिक डॉलफिन, मगरमच्छ, ओलिव रिडले कछुआ एवं केकड़े पाये जाते हैं। यहाँ पर दूर दराज से पक्षी बदलते मौसम के साथ आकर निवास करते हैं।


राष्ट्रीय उद्यान पर्यटन की दृष्टि से भी बहुत अधिक महत्ता रखते हैं एवं हर वर्ष देश विदेश से लाखों की संख्या में पर्यटक यहाँ घूमने आते हैं, जिससे आस पास के क्षेत्र के लघु एवं मध्यम उद्योगों को अत्यधिक लाभ प्राप्त होता है।

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