नहीं मैं डिप्रेशन में नहीं हूं...! - Hindi Biography World

Breaking

Follow by Email

Monday, January 7, 2019

नहीं मैं डिप्रेशन में नहीं हूं...!


कभी इतनी भूख लगती है कि यूं लगता है जैसे आंतें सुखकर चिपक जाएंगी, कभी खाने से यूँ नफरत होती है, कि दो दो दिन निकल जाते हैं कुछ खाए| कभी कभी ज़िन्दगी के सारे लक्ष्य थाली में परोसे नजर आते हैं, लेकिन कभी कभी ऐसा भी लगता है कि मेरा कुछ नहीं हो सकता| कभी कभी मेरा मन होता है कि बाहर जाकर घूमूं, कभी खुद को बंद कमरों की किसी कोनों में पता हूँ| कभी कभी लगता है शायद कल की सुबह न हो, कभी कभी लगता है आज की रात आए न आए| कभी कभी खुद की तारीफ में खुद ही कसीदे पढ़ता हूं, कभी कभी खुद को दुनिया का सबसे जाहिल इंसान पाता हूँ| कभी कभी तुम पर बहुत गुस्सा आता है, बहुत ज्यादा, जब तुम घंटों मुझे फोन नहीं करती, कभी कभी मन करता है कि काश आज तुम फोन ही न करो| कभी कभी मन होता है कि तुम्हें कह दूँ कि सुनो अब चली जाओ, मैं नहीं चाहता कि मेरे साथ तुम्हारी ज़िन्दगी भी बर्बाद हो, कभी कभी ये जी चाहता है कि तुम्हें गले से लगाकर ऐसे जकड़ूं कि फिर तुम मुझे कभी छोड़कर न जा पाओ| पता है कभी कभी सपने देखता हूँ हमारे बुढ़ापे के, जब तुम्हारे दाँत निकल जाएंगे, और मैं तुम्हारी शक्ल का जी भरकर मजाक उड़ाउँगा, कभी कभी लगता है कि शायद तुम भी अब मेरी ज़िन्दगी में कुछ दिनों की मेहमान हो| दरअसल दोनों पाँवों में दो तरह की चप्पलें पहनकर मैं घर से निकल जाता हूँ, हंसते हुए लोगों को देखकर मुझे भी हंसी आ जाती है| अच्छा उस दिन जब मैं दुकान पर दूध के पैसे देकर, दूध वही छोड़ आया था, वो दूध वाले भैया बहुत हँसे थे, कभी मैं भी हँसता था ऐसे| ऐसा नहीं है कि अब नहीं हँसता, अभी भी हँसता हूँ, दहाड़े मार मार के हँसता हूँ, लेकिन कभी ये नहीं पता चलता कि क्यू हंस रहा हूँ, जैसे कभी ये नहीं पता नहीं लग पाया कि रोता क्यूं हूँ| दरअसल मैं डिप्रेशन में नहीं हूं, मैं बस थोड़ा सा बीमार हूँ| ये सिमपथी बटोरने के लिए नहीं लिख रहा, लिख रहा हूँ ताकि कल जब ठीक हो जाऊँ तो यहां आऊँ, और आकर इसे पढूं, और पढ़कर खूब हंसू..! 
मैं ऐसा जरूर करूंगा, 
अगर ज़िंदा रहा तो...! 


1 comment: